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क्या सचिवालय आम लोगों से दूर है..? क्या दर्शन केवल सिफारिश पर ही संभव है..?

तेलंगाना सचिवालय में आम जनता के लिए प्रवेश नहीं मिल पाने की आलोचनाएँ बढ़ रही हैं। घंटों तक इंतज़ार करने के बावजूद मंत्रियों से मिलने का अवसर नहीं मिल रहा है, जिससे लोग अपनी निराशा व्यक्त कर रहे हैं।

Hyderabad News

हैदराबाद: तेलंगाना की जनता की समस्याओं के समाधान का केंद्र होना चाहिए था राज्य सचिवालय, लेकिन अब यह सामान्य जनता के लिए एक किले में बदल गया है, इस पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अपनी समस्याओं को सीधे मंत्रियों और उच्च अधिकारियों के ध्यान में लाने के लिए राज्य के विभिन्न हिस्सों से हैदराबाद पहुंचने वाले लोगों के लिए सचिवालय की दहलीज पार करना भी मुश्किल हो गया है, ऐसा लोगों का कहना है।

घंटों तक सचिवालय के बाहर इंतजार करने के बावजूद कई पीड़ितों का आरोप है कि उन्हें मंत्रियों से मिलने का अवसर नहीं मिल रहा है। जन समस्याओं के समाधान के लिए आए लोगों को अनुमति नहीं दी जा रही है, जबकि सम्मान, शिष्टाचारिक बैठकें और सिफारिशों के साथ आने वालों के लिए दरवाजे आसानी से खुल जाते हैं, ऐसी आलोचनाएं जोर पकड़ रही हैं।

विशेष रूप से महत्वपूर्ण मंत्रियों से मिलने के लिए पूर्व-निर्धारित अपॉइंटमेंट, राजनीतिक संबंध या मजबूत सिफारिश अनिवार्य हो गई है, ऐसा लोगों का मानना है। यदि प्रशासनिक व्यवस्था में सामान्य व्यक्ति की आवाज नहीं सुनी जाती है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक संकेत है, ऐसा राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है।

पिछली सरकार पर "जनता से दूर हो गई" का गंभीर आरोप लगाने वाली वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के बाद भी हालात में कोई बदलाव नहीं आ रहा है, ऐसी शिकायतें सुनाई दे रही हैं। यदि केवल सिफारिश वाले लोगों के लिए सचिवालय के दरवाजे खुलते हैं, तो सामान्य जनता की समस्याओं को कौन सुनेगा? जनता सरकार में यदि जनता का प्रवेश नहीं है, तो यह किसकी सरकार है, ऐसे सवाल अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बन गए हैं।

जनता की कठिनाइयों को सुनने के लिए बनी व्यवस्था में जनता का प्रवेश न होना, समस्याओं को बताने का कोई अवसर न होना, यह चिंताजनक मुद्दा बन गया है। क्या तेलंगाना सचिवालय वास्तव में जनता का सचिवालय है? या यह केवल सिफारिशों और संबंधों वाले लोगों के लिए सीमित एक शक्ति केंद्र बन गया है? ऐसे सवालों का जवाब सरकार को देना आवश्यक है, ऐसा जनता की मांग है।

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