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विवाह प्रणाली को झटका? सहजीवन पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय का विवादास्पद निर्णय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का हालिया सहजीवन निर्णय देशभर में चर्चा का विषय बन गया है। क्या व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नाम पर आया यह निर्णय विवाह प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव डालेगा?

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न्यू दिल्ली, 27 मार्च, 2026

भारत में व्यक्तिगत स्वतंत्रता के नाम पर परिवारिक मूल्यों को नुकसान पहुंचाने वाले इलाहाबाद उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय ने विवादों को जन्म दिया है। एक विवाहित महिला यदि एक अन्य वयस्क महिला के साथ उसकी सहमति से सहजीवन (live-in relationship) जारी रखती है, तो इसे अपराध के रूप में नहीं माना जा सकता, यह स्पष्ट करते हुए कोर्ट ने सामाजिक वर्गों में चिंता उत्पन्न की है।

इस निर्णय के साथ विवाह बंधन की पवित्रता को खतरा होने की राय व्यक्त की जा रही है। विशेष रूप से परिवार प्रणाली पर आधारित भारतीय संस्कृति में, ऐसे निर्णय संबंधों की स्थिरता को प्रभावित कर सकते हैं, इस पर विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है। जबकि कानूनी रूप से यह व्यक्तिगत स्वतंत्रता को समर्थन देने जैसा प्रतीत होता है, नैतिक मूल्यों के मामले में यह खतरनाक संकेत है, ऐसा आलोचकों का कहना है। “विवाहित महिलाएं भी बाहर संबंध बनाए रख सकती हैं, ऐसा संदेश जाने का खतरा है,” कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता व्यक्त की है। इसके अलावा, महिलाओं के अधिकारों के संरक्षण के दृष्टिकोण से भी यह निर्णय संदेह उत्पन्न कर रहा है। सहजीवन में महिलाओं की सुरक्षा, भविष्य की गारंटी जैसे मुद्दे प्रश्नार्थक बन सकते हैं, ऐसा विश्लेषकों का कहना है। कुल मिलाकर, व्यक्तिगत स्वतंत्रता को प्राथमिकता देते हुए दिया गया यह निर्णय समाज में विभाजन और परिवार प्रणाली पर नए चर्चाओं की संभावना को जन्म दे सकता है।

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