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विश्व कप के दर्शकों को डलास स्टेडियम के आसपास छिपे हुए गर्मी के जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। बिदर के ठेकेदार ने राम मंदिर चंदा के दुरुपयोग का आरोप लगाया, विधायक और RSS नेता का नाम लिया। सच्ची ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर इंद्रकीलाद्री पर्वत की भव्य परिक्रमा। दक्षिण मध्य रेलवे ने वेल्दुर्थी के पहले पिग आयरन कंटेनर सेवा के साथ माल परिवहन नेटवर्क का विस्तार किया। क्रिकेट प्रशासन ने कथित अवैध टूर्नामेंटों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की विश्व कप के दर्शकों को डलास स्टेडियम के आसपास छिपे हुए गर्मी के जोखिम का सामना करना पड़ रहा है। बिदर के ठेकेदार ने राम मंदिर चंदा के दुरुपयोग का आरोप लगाया, विधायक और RSS नेता का नाम लिया। सच्ची ज्येष्ठ पूर्णिमा के अवसर पर इंद्रकीलाद्री पर्वत की भव्य परिक्रमा। दक्षिण मध्य रेलवे ने वेल्दुर्थी के पहले पिग आयरन कंटेनर सेवा के साथ माल परिवहन नेटवर्क का विस्तार किया। क्रिकेट प्रशासन ने कथित अवैध टूर्नामेंटों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की

ईरान-इज़राइल युद्ध का असर… क्या भारत में खाद उत्पादन पर संकट आएगा? कृषि क्षेत्र में बढ़ी चिंता

ईरान-इज़राइल युद्ध के कारण क्या भारत में खाद्य उत्पादन प्रभावित होगा? कृषि क्षेत्र और उर्वरक आपूर्ति पर संभावित प्रभाव जानें।

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नई दिल्ली, 9 मार्च,

पश्चिम एशिया में ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी दिखने लगा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तो भारत में खाद (फर्टिलाइज़र) उत्पादन और आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है, जिससे कृषि क्षेत्र प्रभावित होने की आशंका है। भारत खाद उत्पादन के लिए आवश्यक कई कच्चे पदार्थ जैसे प्राकृतिक गैस, अमोनिया और फॉस्फेट का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। इनमें से कई आपूर्तियां खाड़ी देशों और पश्चिम एशिया से आती हैं। यदि युद्ध के कारण इन क्षेत्रों से सप्लाई प्रभावित होती है तो भारत में खाद उत्पादन पर दबाव बढ़ सकता है।

विशेष रूप से होर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है। इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा आने पर परिवहन लागत बढ़ सकती है और आपूर्ति में देरी हो सकती है, जिसका सीधा असर खाद की कीमतों पर पड़ सकता है। हालांकि केंद्र सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भंडार और आयात योजनाओं पर काम कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल किसानों को किसी तरह की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा।

विश्लेषकों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया में तनाव लंबे समय तक जारी रहता है तो आने वाले फसल सीजन में कृषि क्षेत्र पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल सरकार स्थिति की समीक्षा कर रही है और आवश्यक कदम उठाने की तैयारी में है।

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