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श्रीशैल में पारंपरिक रूप से भ्रामरांबा देवी के लिए कुम्भोत्सव मनाया गया।

20 हजार कद्दूओं के साथ भ्रामरांबा देवी को सात्मिक बलि दी गई।

AP/SOUTH

लोककल्याण के लिए श्रीशैलम श्री भ्रामरांबादेवी के लिए पारंपरिक रूप से कुम्भोत्सव भव्य रूप से आयोजित किया गया।

प्रत्येक वर्ष चैत्र मास में पूर्णिमा के बाद आने वाले मंगलवार या शुक्रवार को इस विशेष उत्सव का आयोजन परंपरा के अनुसार होता आ रहा है। इस अवसर पर माँ को सत्त्विक बलि अर्पित करना इस उत्सव का मुख्य आकर्षण बना रहा।

इस उत्सव के अंतर्गत गुम्मड़िकाय, नारियल, नींबू, पका हुआ अन्न जैसे वस्तुओं को माँ को सत्त्विक बलि के रूप में अर्पित किया गया। मंदिर के सूत्रों के अनुसार, इस बार लगभग 20 हजार से अधिक गुम्मड़िकाय, 5 हजार से अधिक नारियल, एक लाख से अधिक नींबू, और साथ ही पका हुआ अन्न (कुम्भ) अर्पित किया गया। सुबह प्रातःकाल की पूजा के बाद श्री भ्रामरांब माँ को नवावरण पूजा, त्रिशति, खड्गमाला, अष्टोत्तर कुम्कुम पूजा, पारायण आदि का आयोजन किया गया। आचार के अनुसार ये सभी पूजाएँ माँ को एकांत में आयोजित की गईं।

इसके बाद मंदिर में रजकरंगवली नामक विशेष पारंपरिक पूजा का आयोजन किया गया। इसमें रजक द्वारा विशेष मुघ्गु बनवाकर, श्रीचक्र के पास विशेष पूजा की गई। इसके बाद सत्त्विक बलि के लिए तैयार किए गए नारियल और गुम्मड़िकाय को पूजा करके माँ को अर्पित किया गया। इसके बाद हरिहरराय गोपुर द्वार पर स्थित महिषासुरमर्दिनी माँ (कोटम्मा देवी) को भी विशेष पूजा करके सत्त्विक बलि अर्पित की गई। आज शाम श्री मल्लिकार्जुन स्वामी को प्रदोषकाल की पूजा के बाद अन्नाभिषेक का आयोजन किया जाएगा।

इसके बाद माँ के मंदिर के सामने स्थित सिंहमंडप में पके हुए अन्न को कुम्भराशि के रूप में रखकर, परंपरा के अनुसार स्त्रीवेष में एक पुरुष द्वारा माँ को कुम्भहारति अर्पित करने से उत्सव का मुख्य चरण प्रारंभ होगा। अंत में माँ को विशेष पूजा, पिण्डीवंटल के साथ महानिवेदन अर्पित किया जाएगा। साथ ही इस उत्सव के अंतर्गत ग्रामदेवी अन्कालम्मा को भी विशेष पूजा का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम में देवस्थानम के कार्यान्वयन अधिकारी एम. श्रीनिवासराव, धर्मकर्त्ताओं की परिषद के सदस्य, अर्चक स्वामी, वेदपंडित, सहायक कार्यान्वयन अधिकारी, पर्यवेक्षक, संबंधित कर्मचारी शामिल हुए।

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